PM Vishwakarma Yojana 2026: 18 ट्रेड्स के लिए 15000 टूलकिट और 30 लाख परिवारों का सपना होगा सच

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प्रधानमंत्री विश्वकर्मा योजना 2025 भारत सरकार द्वारा पारंपरिक कारीगरों और शिल्पकारों के लिए शुरू की गई महत्वपूर्ण योजना है। देश में लाखों लोग पारंपरिक हुनर और हस्तशिल्प के जरिए अपने परिवार का पालन-पोषण करते हैं, लेकिन आर्थिक कमी, नए उपकरणों की उपलब्धता और डिजिटल पहचान की कमी के कारण इन्हें कई परेशानियों का सामना करना पड़ता है। सरकार की यह पहल ऐसे लोगों को सामाजिक सम्मान दिलाने के साथ उनकी आय और कौशल को भी बढ़ाने का लक्ष्य लेकर आई है।

यह योजना खास तौर पर ग्रामीण और शहरी इलाकों में काम कर रहे पारंपरिक कारीगरों के लिए है। इसमें बढ़ई, लोहार, ठठेरा, मूर्तिकार, दर्जी, नाई जैसे 18 ट्रेड्स में काम करने वाले लोग शामिल हैं। सरकार इन कारीगरों को नई तकनीक, टूल्स, डिजिटल पहचान और बाजार तक आसान पहुंच कराने में मदद करती है। इससे उनकी रोज़गार क्षमता और आमदनी दोनों में बढ़ोतरी होती है।

PM Vishwakarma Yojana 2025

प्रधानमंत्री विश्वकर्मा योजना की शुरुआत 2023 में हुई थी और इसका उद्देश्य अगले पांच साल में लगभग 30 लाख परिवारों तक इसका सीधा लाभ पहुंचाना है। यह योजना पूरी तरह केंद्र सरकार द्वारा फंड की जाती है। इसका संचालन सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम मंत्रालय, कौशल विकास मंत्रालय और वित्त मंत्रालय मिलकर करते हैं।

यह योजना पारंपरिक कारीगरों को उनकी पहचान, आर्थिक सहायता, स्किल ट्रेनिंग और सस्ते लोन जैसी सुविधाएं प्रदान करती है। लाभार्थियों को पीएम विश्वकर्मा सर्टिफिकेट और यूनिक आईडी कार्ड मिलता है, जिससे वे सरकारी योजनाओं के लाभ, मार्केट में पहचान और डिजिटल प्लेटफार्म तक पहली बार पहुंचते हैं।

अत्यंत महत्वपूर्ण बात यह है कि योजना के तहत पात्र कारीगरों को सरकार द्वारा 15,000 रुपये की टूलकिट इंसेंटिव सहायता दी जाती है। यह सहायता लाभार्थी को आधुनिक टूल्स या कच्चा माल खरीदने के लिए दी जाती है, ताकि वे अपने काम की गुणवत्ता और प्रोडक्टिविटी बढ़ा सकें। इसके अलावा, योजना में ट्रेनिंग, मासिक भत्ता, शून्य जमानत पर लोन, डिजिटल सशक्तिकरण, ब्रांड प्रमोशन जैसी सुविधाएं भी हैं।

15000 रुपये का लाभ और अतिरिक्त सहायता

जिस कारीगर और शिल्पकार की पहचान सरकारी प्रक्रिया से हो जाती है, उसे योजना पोर्टल पर पंजीकरण कराने के बाद 15,000 रुपये टूलकिट इंसेंटिव के रूप में मिलते हैं। यह राशि विशेष रूप से टूल्स या कच्चा माल खरीदने में उपयोग की जा सकती है, ताकि कारीगर अपनी कार्यशैली को आधुनिक बना सकें और अपनी आय में वृद्धि कर सकें।

अगर लाभार्थी को ट्रेनिंग में बुलाया जाता है, तो उसे प्रति दिन 500 रुपये का भत्ता भी मिलता है, अधिकतम 5 दिन तक। ट्रेनिंग पूरी करने के बाद बिना जमानत के 1 लाख रुपये तक का सस्ता लोन पहली किस्त के रूप में दिया जाता है, जिस पर सिर्फ 5% ब्याज लगता है। पहली किस्त चुकाने के बाद, डिजिटल लेन-देन सीखने पर 2 लाख रुपये दूसरी किस्त के रूप में दिए जा सकते हैं, जिसे 30 महीने में चुकाना होता है।

योजना के अन्य लाभ

सरकार ने इस योजना में कारीगरों को आर्थिक सहयोग से कहीं आगे सोचकर स्किल अपग्रेडेशन ट्रेनिंग, डिजिटल भुगतान की ट्रेनिंग, उनके कार्यों की ऑनलाइन और ऑफलाइन ब्रांडिंग, और नए तकनीकी साधनों से जोड़ने की सुविधाएं शामिल की हैं। लाभार्थियों को पहचान पत्र और सर्टिफिकेट के साथ बाजार और सरकारी पोर्टल्स जैसे GeM, ONDC में उत्पादों की बिक्री का अवसर मिलता है।

पात्रता की शर्तें

इस योजना का लाभ वही व्यक्ति उठा सकते हैं, जो सरकार द्वारा मान्य 18 ट्रेड्स यानी बढ़ई, लोहार, सुनार, कुम्हार, मूर्तिकार, दर्जी आदि में कार्यरत हैं। आवेदक की न्यूनतम उम्र 18 वर्ष होनी चाहिए और वे किसी भी सरकारी नौकरी में ना हों। एक ही परिवार का एक सदस्य योजना का लाभ ले सकता है। अगर पहले से किसी दूसरी सरकारी योजना, जैसे पीएम–SVANidhi का लाभ उठाया है और उसका लोन अभी बाकी है, तो जब तक उसका भुगतान नहीं हो जाता, तब तक इस योजना का फायदा नहीं मिलेगा।

आवेदन प्रक्रिया

आवेदन के लिए सबसे पहले पीएम विश्वकर्मा योजना की वेबसाइट या नजदीकी कॉमन सर्विस सेंटर (CSC) पर जाना होगा। यहां पर आधार कार्ड आधारित बायोमेट्रिक सत्यापन के साथ रजिस्ट्रेशन किया जाता है।
आवेदन के समय आवेदक को आधार कार्ड, पहचान पत्र, निवास प्रमाण पत्र, बैंक पासबुक, पासपोर्ट फोटो, जाति प्रमाण पत्र, मोबाइल नंबर और ईमेल आईडी जैसी जरूरी दस्तावेज़ देने पड़ते हैं।
आवेदन के बाद सरकारी अधिकारी पात्रता और कारीगरी की जांच करते हैं।
पात्र पाए जाने पर ट्रेनिंग शेड्यूल और 15,000 रुपये की टूलकिट इंसेंटिव मिलता है।
इसके बाद, उम्मीदवार स्किल ट्रेनिंग लेकर लोन के लिए भी अप्लाई कर सकता है।
किसी भी सहायता या जानकारी के लिए ऑफिशियल हेल्पलाइन नंबर 18002677777 और 17923 पर संपर्क किया जा सकता है।

योजना की वर्तमान स्थिति

सितंबर 2023 के बाद से इस योजना के तहत लाखों कारीगर और शिल्पकार सीधे लाभान्वित हो चुके हैं। सरकार ने अगले सालों में पूरे भारत में योजना को बढ़ावा देने और और अधिक लाभार्थियों को जोड़ने का लक्ष्य रखा है।

निष्कर्ष

प्रधानमंत्री विश्वकर्मा योजना पारंपरिक कारीगरों और शिल्पकारों के लिए एक अत्यंत लाभकारी पहल है, जिसमें 15,000 रुपये की टूल्स सहायता के साथ आसान लोन, स्किल ट्रेनिंग और ब्रांडिंग जैसी सुविधाएं मिलती हैं। इससे इन कारीगरों का जीवन और काम दोनों बेहतर हुए हैं और भारत की हस्तशिल्प विधा को भी नई पहचान मिली है।

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