साल 2026 खगोलीय घटनाओं के नजरिए से बहुत ही खास होने वाला है। इस साल दुनिया के अलग-अलग हिस्सों में रहने वाले लोग अद्भुत सूर्य ग्रहण (Solar Eclipse) के गवाह बनेंगे। वैज्ञानिकों और ज्योतिषियों के लिए यह साल काफी महत्वपूर्ण है क्योंकि 2026 में एक नहीं बल्कि दो-दो सूर्य ग्रहण लगने वाले हैं।
खगोल विज्ञान में रुचि रखने वाले लोगों के लिए Surya Grahan 2026 एक बड़ी खबर है। पहला ग्रहण फरवरी के महीने में लगेगा, जो कि एक ‘रिंग ऑफ फायर’ यानी वलयाकार सूर्य ग्रहण होगा। इसके बाद अगस्त के महीने में एक पूर्ण सूर्य ग्रहण दिखाई देगा, जो कि बेहद दुर्लभ नजारा होता है।
इस लेख में हम आपको Surya Grahan 2026 से जुड़ी हर छोटी-बड़ी जानकारी देंगे। इसमें ग्रहण कब लगेगा, इसकी टाइमिंग क्या होगी और क्या यह भारत में दिखाई देगा या नहीं, इन सभी सवालों के जवाब आपको विस्तार से मिलने वाले हैं। आइए जानते हैं साल 2026 के सूर्य ग्रहण का पूरा टाइम टेबल।
Surya Grahan 2026: कब, कहां और कैसे दिखेगा सूर्य ग्रहण?
साल 2026 का पहला सूर्य ग्रहण 17 फरवरी 2026 को लगने जा रहा है। यह ग्रहण फाल्गुन मास की अमावस्या तिथि पर लगेगा और कुंभ राशि व धनिष्ठा नक्षत्र में घटित होगा। वैज्ञानिकों के अनुसार यह एक ‘कंकण’ या वलयाकार ग्रहण होगा, जिसमें चंद्रमा सूर्य के बीच के हिस्से को ढकता है और किनारे एक चमकदार छल्ले की तरह दिखते हैं।
दूसरा सूर्य ग्रहण 12 अगस्त 2026 को लगेगा, जो कि एक पूर्ण सूर्य ग्रहण (Total Solar Eclipse) होगा। इस दौरान कुछ समय के लिए दिन में ही अंधेरा छा जाएगा। यह नजारा मुख्य रूप से यूरोप और आर्कटिक क्षेत्रों में दिखाई देगा। भारत के लोग इन खगोलीय घटनाओं को लेकर काफी उत्सुक हैं, लेकिन दृश्यता के मामले में कुछ महत्वपूर्ण बातें जान लेना जरूरी है।
17 फरवरी 2026 का सूर्य ग्रहण और टाइम टेबल (First Solar Eclipse 2026)
साल का पहला सूर्य ग्रहण 17 फरवरी को भारतीय समयानुसार दोपहर 03:26 बजे शुरू होगा। इस ग्रहण का मध्य समय शाम 05:42 बजे होगा और इसका समापन शाम 07:57 बजे होगा। यह ग्रहण लगभग 4 घंटे से अधिक समय तक चलेगा, जो एक लंबी अवधि मानी जाती है।
चूंकि यह ग्रहण कुंभ राशि में लग रहा है, इसलिए ज्योतिष शास्त्र के अनुसार इसका असर अलग-अलग राशियों पर अलग-अलग हो सकता है। वैज्ञानिकों के लिए यह ग्रहण अंटार्कटिका के बर्फीले क्षेत्रों में शोध करने का एक बड़ा अवसर लेकर आएगा। हालांकि, सामान्य लोगों के लिए इसे देख पाना थोड़ा मुश्किल होगा।
यह ग्रहण मुख्य रूप से दक्षिणी अफ्रीका, नामीबिया, मॉरीशस, बोत्सवाना और अंटार्कटिका में दिखाई देगा। भारत में यह ग्रहण नजर नहीं आएगा, जिसके कारण भारतीय लोग इस खूबसूरत ‘रिंग ऑफ फायर’ को लाइव स्ट्रीम के जरिए ही देख पाएंगे।
12 अगस्त 2026 का पूर्ण सूर्य ग्रहण (Total Solar Eclipse Visibility)
साल का दूसरा और सबसे बड़ा आकर्षण 12 अगस्त 2026 को होने वाला पूर्ण सूर्य ग्रहण है। यह ग्रहण आधुनिक समय के सबसे महत्वपूर्ण ग्रहणों में से एक माना जा रहा है। इसकी छाया रूस के साइबेरिया से शुरू होकर आइसलैंड और स्पेन तक जाएगी।
स्पेन में यह ग्रहण सूर्यास्त से कुछ समय पहले दिखाई देगा, जो फोटोग्राफी के शौकीनों के लिए एक बेहतरीन मौका होगा। आइसलैंड में भी पूर्णता की स्थिति लगभग 2 मिनट तक बनी रहेगी। इस दौरान वैज्ञानिकों को सूर्य के बाहरी वातावरण यानी ‘कोरोना’ का अध्ययन करने का मौका मिलता है।
यह ग्रहण भी भारत में दिखाई नहीं देगा। पूर्ण सूर्य ग्रहण का पथ मुख्य रूप से उत्तरी गोलार्ध के ऊंचे अक्षांशों से होकर गुजरेगा। हालांकि, इंग्लैंड, फ्रांस और जर्मनी जैसे देशों में लोग आंशिक सूर्य ग्रहण (Partial Solar Eclipse) का आनंद ले सकेंगे।
क्या भारत में दिखेगा ग्रहण और सूतक काल? (Visibility in India and Sutak Kaal)
भारत में रहने वाले लोगों के लिए सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या वे इसे अपनी आंखों से देख पाएंगे। आधिकारिक आंकड़ों और खगोलीय गणनाओं के अनुसार, साल 2026 के दोनों ही सूर्य ग्रहण भारत में दिखाई नहीं देंगे। चूंकि ये ग्रहण भारत के क्षितिज पर नहीं होंगे, इसलिए इनका कोई सीधा प्रभाव नहीं पड़ेगा।
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, जिस स्थान पर ग्रहण दिखाई नहीं देता, वहां सूतक काल (Sutak Kaal) भी मान्य नहीं होता है। इसका मतलब है कि भारत में रहने वाले लोगों को मंदिर के कपाट बंद करने या पूजा-पाठ रोकने की आवश्यकता नहीं होगी। सामान्य जनजीवन और धार्मिक अनुष्ठान हमेशा की तरह चलते रहेंगे।
हालांकि, जो भारतीय नागरिक विदेश में इन क्षेत्रों (जैसे स्पेन या आइसलैंड) में रह रहे हैं, उनके लिए वहां के समय के अनुसार सूतक और ग्रहण के नियम लागू हो सकते हैं। खगोल प्रेमियों के लिए नासा (NASA) और अन्य वैज्ञानिक संस्थाएं इन घटनाओं का सीधा प्रसारण ऑनलाइन करेंगी।
सूर्य ग्रहण देखने के लिए सुरक्षा टिप्स (Safety Precautions for Solar Eclipse)
भले ही यह ग्रहण भारत में न दिखे, लेकिन अगर आप इसे देखने के लिए विदेश जा रहे हैं या भविष्य में किसी ग्रहण को देखना चाहते हैं, तो सुरक्षा का ध्यान रखना बहुत जरूरी है। कभी भी नंगी आंखों से सूर्य को सीधे नहीं देखना चाहिए, क्योंकि इससे आंखों की रोशनी जा सकती है।
ग्रहण देखने के लिए हमेशा प्रमाणित सोलर फिल्टर या ग्रहण वाले चश्मों (ISO certified glasses) का उपयोग करना चाहिए। साधारण धूप के चश्मे (Sunglasses) सूर्य की हानिकारक किरणों को रोकने में सक्षम नहीं होते हैं। दूरबीन या कैमरे का उपयोग करते समय भी उनके आगे विशेष सोलर फिल्टर लगाना अनिवार्य है।
निष्कर्ष: खगोलीय प्रेमियों के लिए बड़ा साल
Surya Grahan 2026 निश्चित रूप से विज्ञान की दुनिया के लिए एक बड़ा आयोजन है। 17 फरवरी और 12 अगस्त की तारीखें कैलेंडर में मार्क करने लायक हैं। हालांकि भारत में इसकी दृश्यता शून्य है, लेकिन इंटरनेट के माध्यम से हम इस ब्रह्मांडीय घटना के साक्षी बन सकते हैं।
यह हमें याद दिलाता है कि हमारा ब्रह्मांड कितना विशाल और आश्चर्यजनक है। आने वाले समय में वैज्ञानिक इन ग्रहणों से मिलने वाले डेटा का उपयोग सूर्य के रहस्यों को समझने में करेंगे। यदि आप खगोल विज्ञान में रुचि रखते हैं, तो इस साल के दोनों ग्रहणों की ऑनलाइन कवरेज जरूर देखें।
Disclaimer: यह लेख केवल सूचनात्मक उद्देश्यों के लिए है। लेख में दी गई सूर्य ग्रहण की तिथियां और समय खगोलीय गणनाओं पर आधारित हैं, जो भविष्य में वैज्ञानिक एजेंसियों द्वारा अपडेट किए जा सकते हैं। भारत में इस ग्रहण की दृश्यता नहीं होने के कारण धार्मिक नियमों का पालन करना है या नहीं, यह आपका व्यक्तिगत निर्णय या स्थानीय पुरोहितों की सलाह पर निर्भर करता है। यह किसी भी प्रकार की सरकारी योजना (Yojana) नहीं है, बल्कि एक खगोलीय समाचार है।







